चेकगुरुवार, 22 अक्टूबर

जिज्ञासा ध्यान भटकाना नहीं है।

वह भटकाव तभी बनती है जब आप बीच में रुक जाते हैं: लेख खोला पर पढ़ा नहीं, कोर्स शुरू किया पर पूरा नहीं किया।

जिज्ञासा के पीछे आख़िर तक जाना एक हुनर है।

“मेरे पास कोई ख़ास प्रतिभा नहीं है। मैं बस बेहद जिज्ञासु हूँ।”
Albert Einstein, कार्ल ज़ेलिग को पत्र, 1952 (हमारा अनुवाद)
आज का आपका एक कदम

इस हफ़्ते जिस चीज़ ने आपकी जिज्ञासा जगाई, उसे चुनिए और उसके साथ आख़िर तक जाइए।

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हर रविवार शाम एक छोटा-सा ईमेल, आपका हफ़्ता तैयार करने के लिए: एक चीज़ जिसका इंतज़ार हो, रफ़्तार के लिए एक कदम, और एक चीज़ जिस पर ध्यान देना है। पढ़ने में दो मिनट।

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